शुक्रवार, 4 नवंबर 2022

डॉ. होमी जहाँगीर भाभा Biography

 

टाटा फंडामेंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट में एक शिक्षक छात्रों को परमाणु ऊर्जा के बारे में समझा रहा था। इतने में ही इस शिक्षक के निजी सहायक उन्हें धीरे से बुलाते है और कान में फुसफुसाकर कहते है कि सर, प्रधानमंत्री नेहरू जी आपसे बात करना चाहते है। इस पर वह शिक्षक अपने निजी सहायक से कहता है कि उनसे कहिये कि मैं अभी बच्चों को पढ़ा रहा हूँ, कक्षा खत्म होने तक वे इंतज़ार करें, फिर मैं उनसे बात कर लूँगा।

उपर्युक्त परिच्छेद में जिन शिक्षक महोदय की बात हो रही थी, उनका नाम है- डॉ. होमी जहाँगीर भाभा। भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक और आज़ाद भारत मे वैज्ञानिक चेतना के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले भाभा का जन्म आज ही के दिन यानी 30 अक्तूबर 1909 को मुंबई के एक प्रतिष्ठित पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता जहाँगीर भाभा एक प्रसिद्ध वकील थे।

होमी जहाँगीर भाभा की प्रारम्भिक शिक्षा उनके गृहक्षेत्र मुम्बई में ही स्थित कैथेड्रल स्कूल और जॉन केनन स्कूल से संपन्न हुई थी। स्कूली शिक्षा के दौरान ही उनमें गणित और भौतिकी विषयों में रूचि उत्पन्न हो गई थी। बारहवीं की पढ़ाई उन्होंने मुम्बई के एलफिंस्टन कॉलेज से की थी। इसके उपरांत उन्होंने रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई के लिये होमी जहाँगीर भाभा लंदन चले गए।

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दरअसल उनके पिताजी चाहते थे कि वो मैकेनिकल इंजीनियर बने। इसलिये उन्होंने 1927 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। हालाँकि मैकेनिकल इंजीनियरिंग में उनका दिल न लगता था। 1930 में उन्होंने कैवेंडिश लैब में दाखिला लिया। यहाँ पर समय बिताना व शोध करना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। इस दौरान भौतिकी विषय मे शोध कार्यों को लेकर उनकी रूचि लगातार बढ़ती रही।

कॉस्मिक किरणों और उनके अनुप्रयोगों पर वो लगातार शोध कर रहे थे। इसके लिये वे जर्मनी भी गए। वर्ष 1933 में कॉस्मिक किरणों पर उनका शोधपत्र द अबज़ाॅर्पशनऑफ कॉस्मिक रेडिएशन प्रकाशित हुआ। इस शोधपत्र में उन्होंने कॉस्मिक किरणों की अवशोषक और इलेक्ट्रॉन उत्पन्न करने की क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इसके एक वर्ष बाद यानी साल 1934 में कॉस्मिक किरणों संबंधी अपने शोधकार्य हेतु कैम्ब्रिज विश्विद्यालय से पीएचडी की उपाधि भी धारण की।

वर्ष 1934 में ही उन्हें आइज़क न्यूटन स्टूडेंटशिप भी प्राप्त हुई। इस दौरान उन्होंने रदरफोर्ड जैसे नामी वैज्ञानिक के साथ भी काम किया। वर्ष 1939 में डॉ. होमी जहाँगीर भाभा वापिस भारत आ गए। भारत आकर उन्होंने बेंगलुरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में भौतिक विज्ञान के रीडर के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया। यहाँ पर कॉस्मिक किरणों पर नवीनतम खोज हेतु एक अलग विभाग की स्थापना भी की। इसी दौरान वर्ष 1941 में महज 31 वर्ष की आयु में उन्हें रॉयल सोसाइटी का सदस्य भी चुना गया। वर्ष 1944 में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु में ही वे भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर नियुक्त हुए।

डॉ. होमी जहाँगीर भाभा, उद्योगपति जेआरडी टाटा के अभिन्न मित्र भी थे। इन दोनों प्रबुद्ध जनों की इस प्रगाढ़ मित्रता की प्रमुख वजह इनका भारत में वैज्ञानिक चेतना के विकास को लेकर एक जैसी समझ का होना था। इसीलिये उन्होंने साथ मिलकर वर्ष 1957 में मुम्बई के नजदीक ट्रॉम्बे में टाटा फंडामेंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना भी की। इस संस्थान के पहले निर्देशक के रूप में होमी जहाँगीर भाभा ने ही कार्य किया। कालांतर में इंदिरा गांधी ने इसी संस्थान का नाम बदलकर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र कर दिया।

विज्ञान के अलावा शास्त्रीय संगीत, मूर्तिकला और नृत्यकला में भी उनकी रूचि थी। इसीलिये प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. सी. वी. रमण उन्हें भारत का लिओनार्दो दा विंची भी कहते थे। डॉ. होमी जहाँगीर भाभा द्वारा परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र मे किये गए नवीनतम अनुसंधान आधुनिक भारत के निर्माण की कहानी है। वे न सिर्फ एक कुशल शिक्षक व वैज्ञानिक थे बल्कि एक सजग राष्ट्रप्रहरी भी थे।

यही कारण है कि उन्होंने भारत से जाकर विदेशों में बस चुके वैज्ञानिकों से देश वापिस लौटने की अपील भी की। वर्ष 1947 में उनके नेतृत्व में भारत के भावी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में एक सशक्त परमाणु नीति का निर्माण करना था। इस कार्यक्रम के 1 वर्ष बाद यानी वर्ष 1948 में ही भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना की जाती है।

यदि डॉ. होमी जहाँगीर भाभा के द्वारा विज्ञान के क्षेत्र मे दिये गए योगदान पर चर्चा करें तो उन्होंने भौतिकी के विभिन्न क्षेत्रों में नये-नये अनुसंधान किये हैं। भाभा ने इलेक्ट्रॉनों द्वारा पॉजिट्रॉन को बिखेरने की संभावना के लिये एक सटीक अभिव्यक्ति की रूपरेखा प्रस्तुत की। भाभा ने अपनी विज्ञान कूटनीति के माध्यम से भारत को इस क्षेत्र मे शक्ति संपन्न बनाने में भी अहम योगदान दिया।

वर्ष 1960 के दशक में विकसित देश द्वारा विकासशील देशों को लगातार ये सलाह दी जा रही थी कि इन्हें परमाणु शक्ति संपन्न होने से पहले दूसरे पहलुओं पर ध्यान देना चाहिये। विकसित देशों द्वारा उठाई जा रही इस बात का ज़ोरदार खंडन करते हुए डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने कहा कि विकासशील देशों को अपने यहाँ विकास कार्यों में परमाणु ऊर्जा की सहायता अवश्य लेनी चाहिये।

उनके इन्हीं प्रयासों का नतीजा था कि भारत मे वर्ष 1954 में परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना की गई। इस विभाग का प्रमुख दायित्व था कि यह भारत के लिये एक सशक्त परमाणु ऊर्जा नीति की रूपरेखा निर्मित करे। डॉ. होमी जहाँगीर भाभा द्वारा किये जा रहे इन प्रयासों का ही नतीजा था कि 18 मई 1974 को भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग द्वारा पोखरण में भारत का पहला भूमिगत परमाणु परीक्षण संपादित किया गया। बाद में वर्ष 1998 में भारत जब पूर्णतया परमाणु शक्ति संपन्न देश बना तो इसने भारत के पड़ोसियों चीन और पाकिस्तान के साथ भी शक्ति संतुलन स्थापित किया।

भारत द्वारा परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में शक्ति संपन्न बनने का परिणाम अनेक क्षेत्रों में परिलक्षित होता है। इसने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया है। लंबी दूरी की बैलेस्टिक मिसाइलों, समुद्र आधारित परमाणु वेक्टर, सीमित बैलेस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम का निर्माण इन्हीं की बुनियाद पर किया गया है। भाभा ने परमाणु ऊर्जा तकनीक के व्यापक कमांड और नियंत्रण पर भी काम किया है। चूँकि भारत में यूरेनियम की कमी है और यूरेनियम प्रमुख नाभिकीय ईंधन है। इसलिये भाभा ने नाभिकीय ईंधन के रूप में थोरियम के विकास हेतु भी अनुसंधान शुरू किये। इसी के बाद फर्स्ट टाइप रिएक्टर की अवधारणा सामने आई। इसमें प्लूटोनियम की मदद से थोरियम का विखंडनीय पदार्थ के रूप में विकास किया गया।

यह भाभा के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज भारत मे 5 परमाणु शोध केंद्र है- भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान, मुम्बई , इंदिरा गाँधी परमाणु ऊर्जा संस्थान, कलपक्कम , उन्नत तकनीकी केंद्र, इंदौर, वेरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रोन केंद्र, कोलकाता और परमाणु पदार्थ अन्वेषण एवं अनुसंधान निर्देशालय, हैदराबाद है। इसके अलावा सात संस्थाएँ हैं जो परमाणु अनुसंधान में सहायता करती हैं- टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुम्बई , टाटा स्मारक केंद्र, मुम्बई , भौतिकी संस्थान, भुवनेश्वर , साहा भौतिकी संस्थान, कोलकाता , मेहता गणित एवं गणितीय संस्थान, इलाहाबाद , गणित विज्ञान संस्थान, चेन्नई , प्लाजमा अनुसंधान संस्थान, गांधीनगर है। आज भारत के पास 22 नाभिकीय ऊर्जा रिएक्टर है जहाँ पर 24 हजार मेगावॉट नाभिकीय विद्युत का उत्पादन होता है।

डॉ. होमी जहाँगीर भाभा को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दिये गए उनके अमूल्य योगदान के लिये विभिन्न पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 1943 में उन्हें एडम्स पुरस्कार मिला। भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में दिये गए उनके अद्वितीय योगदान हेतु उन्हें वर्ष 1948 में हॉपकिंस पुरस्कार दिया गया। वर्ष 1954 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया। भाभा को 5 बार नोबेल पुरस्कार हेतु भी नामित किया गया। हालाँकि उन्हें यह पुरस्कार मिल न सका लेकिन विज्ञान के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को कभी भुलाया न जा सकता है।

 

 

शनिवार, 23 अप्रैल 2022

What Was Vernacular Press Act??


 

वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट, 1878 (Vernacular Press Act)

1857 की महान क्रांति का एक प्रमुख परिणाम था-शासक और शासितों के बीच संबंधों में कटता। 1858 के पश्चात यूरोपीय प्रेस ने सरकार की नीतियों का समर्थन किया तथा विवादास्पद मामलों में सरकारी पक्ष का साथ दिया, किंतु देशी भाषाओं के प्रेस सरकारी नीतियों के तीव्र आलोचक थे। लार्ड लिटन की प्रतिक्रियावादी नीतियों के कारण भारतीयों में सरकार के विरुद्ध तीव्र असंतोष था। 1876-77 में भीषण अकाल से एक ओर जहां लाखों लोग मौत के मुंह से समा गये, वहीं दूसरी ओर, जनवरी 1877 में दिल्ली में भव्य दरबार का आयोजन किया गया। इन सभी कारणों से भारतीयों में उपनिवेशी शासन के विरुद्ध घृणा की भावना निरंतर बढ़ रही थी। दूसरी ओर लॉर्ड लिटन ने यह निष्कर्ष निकाला कि भारतीयों में इस असंतोष का कारण मैकाले एवं मैटकॉफ की गलत नीतियां थीं। फलतः उसने भारतीयों की भावनाओं को दबाने का निर्णय लिया।

1878 के देशी भाषा समाचार-पत्र अधिनियम (वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट) को बनाने का उद्देश्य, भारतीय भाषाओं के समाचार-पत्रों पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करना तथा राजद्रोही लेखों को दबाना एवं ऐसे प्रयास के लिये समाचार-पत्रों को दंडित करना था। इस अधिनियम के मुख्य प्रावधान निम्नानुसार थे

1. जिला दण्डनायकों (District magistrate) को यह अधिकार दिया गया कि वे स्थानीय सरकार की आज्ञा से किसी भी भारतीय भाषा के समाचार-पत्र के प्रकाशक या मुद्रक को बुलाकर बंधन-पत्र (Bond) पर हस्ताक्षर करने के लिये कह सकते हैं। इस बंधन-पत्र में यह प्रावधान था कि ये प्रकाशक या मुद्रक ऐसी कोई भी सामग्री प्रकाशित नहीं करेंगे, जिससे सरकार के विरुद्ध असंतोष भड़के अथवा साम्राज्ञी की प्रजा के विभिन्न जाति, धर्म और वर्ण के लोगों के मध्य आपसी वैमनस्य बढ़े।

दण्डनायक का निर्णय अंतिम होगा तथा उसके विरुद्ध किसी प्रकार की अपील की अनुमति नहीं होगी।

3. देशी भाषा का कोई समाचार-पत्र यदि इस अधिनियम की कार्यवाही से बचना चाहे तो उसे पहले से अपने पत्र की एक प्रमाण प्रति (Proof copy) सरकारी पत्रेक्षण को देनी होगी।

इस अधिनियम को ‘मुंह बंद करने वाले अधिनियम’ की संज्ञा दी गयी। इस अधिनियम का सबसे घृणित पक्ष यह था कि-

(i) इसके द्वारा अंग्रेजी एवं देशी भाषा के समाचार-पत्रों के मध्य भेदभाव किया गया था; एवं

(ii) इसमें अपील करने का कोई अधिकार नहीं था।

गुरुवार, 9 दिसंबर 2021

दिल्ली सल्तनत Delhi Sultanate in hindi

 

दिल्ली सल्तनत के शासक (Rulers of Delhi Sultanate in hindi)

दिल्ली सल्तनत में पांच अलग-अलग राजवंशों की श्रृंखला थी जिन्होंने 1206 और 1526 के बीच उत्तरी भारत पर शासन किया था।मुस्लिम पूर्व में सैनिकों को गुलाम बना दिया- मामलूक -तुर्क और पश्तून जातीय समूहों से बारी में इन राजवंशों में से प्रत्येक की स्थापना की ।यद्यपि उनके पास महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रभाव थे, फिर भी सल्तनत स्वयं मजबूत नहीं थीं और उनमें से कोई भी विशेष रूप से लंबे समय तक नहीं चली, बजाय एक वारिस को राजवंश का नियंत्रण पारित किया। 
Delhi Sultanate from 1206AD to 1526AD PartII
दिल्ली की प्रत्येक सल्तनत ने मध्य एशिया की मुस्लिम संस्कृति और परंपराओं और भारत की हिंदू संस्कृति और परंपराओं के बीच आत्मसात और आवास की प्रक्रिया शुरू की, जो बाद में 1526 से 1857 तक मुगल राजवंश के तहत अपने अपोजी तक पहुंचेगी।वह विरासत आज भी भारतीय उपमहाद्वीप को प्रभावित करती रहती है। 

गुलाम या मामलूक वंश Gulam Vansh/Dynasty 

कुतुब-उद-दिन अयबाक ने 1206 में मामलुक राजवंश की स्थापना की । वह एक मध्य एशियाई तुर्क और ढहते घुरद सल्तनत के लिए एक पूर्व जनरल थे, एक फारसी राजवंश जिसने अब ईरान, पाकिस्तान, उत्तरी भारत और अफगानिस्तान पर शासन किया था । हालांकि, कुतुब-उद-Dïn 's शासनकाल अल्पकालिक था, जैसा कि उनके कई पूर्ववर्ती थे, और १२१० में उनकी मृत्यु हो गई ।मामलुक राजवंश का शासनकाल उनके दामाद इल्तुतमिश को पारित कर दिया जो 1236 में अपनी मृत्यु से पहले देहली में सल्तनत को सही मायने में स्थापित करने के लिए आगे बढ़ेंगे। 

रविवार, 20 दिसंबर 2020

BAD BANK in hindi

 बैड बैंक की अवधारणा





  • बैड बैंक, दूसरे वित्तीय संस्थानों के खराब ऋण और अन्य अवैध परिसंपत्तियों को खरीदने के लिए स्थापित किया जाने वाला बैंक होता है।
  • बड़ी मात्रा में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां रखने वाली संस्थाओं द्वारा इन परिसंपत्तियों को बाजार मूल्य पर बैड बैंक को बेंचा जाएगा।
  • इस तरह की परिसंपत्तियों को बैड बैंक में स्थानांतरित करने से, मूल संस्थाओं द्वारा अपनी बैलेंस शीट को सही किया जा सकता है – हालांकि इन्हें परिसंपत्तियों के अनुमानित मूल्य में कटौती करना होगा।

बैड बैंक से लाभ

शनिवार, 21 नवंबर 2020

The Liberlism - उदारतावाद - भारत का उदारवाद

 आज के समय में राज्यों के हस्तक्षेपकारी उपायों को दिए गए महत्व के साथ, कुछ कारणों की राय के माध्यम से इस तरह के उपायों के कारणों और परिणामों की समझ को सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य की उत्पत्ति और भूमिका का अध्ययन आवश्यक हो जाता है। व्यक्तियों के जीवन में गठन और राज्य की भूमिका के बारे में सबसे महत्वपूर्ण दार्शनिक और अर्थशास्त्री।


राज्य की अवधारणा में राजनीतिक चिंतन का मूल शामिल है।


राजनीतिक चिंतन को 'राज्य, उसकी संरचना, उसकी प्रकृति और उसके उद्देश्य के बारे में विचार' के रूप में परिभाषित किया गया है। कई राजनीतिक विचारकों और विचारों के स्कूलों ने विभिन्न दृष्टिकोणों के अनुसार राज्य की प्रकृति और उद्देश्य के बारे में विचारों को विकसित किया है। जब नए विचार सामने आए, तो पुराने विचारों की आलोचना या संशोधन किया गया। राजनीतिक दर्शन के दायरे में, यह आवश्यक नहीं है कि नए विचारों के स्वीकार्य होने से पहले पुराने विचार मृत हों। प्राकृतिक विज्ञान के सिद्धांतों के विपरीत, राजनीतिक सिद्धांत के पुराने और नए सिद्धांत एक साथ मौजूद हैं, उनका सही स्थान का दावा करते हैं।




उदारतावाद

उदारवाद al एक विचारधारा है जो व्यक्तिवाद, स्वतंत्रता, निर्वासन और सहमति के प्रति प्रतिबद्धता पर आधारित है ’।


भूमिका का उदार सिद्धांत, उसके कार्य और राज्य शक्ति की प्रकृति पर हमेशा ध्यान दिया जाएगा:


व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सुनिश्चित करना, सुरक्षा करना और बढ़ाना

राज्य की भूमिका और कार्यों को सीमित करना

राज्य के हस्तक्षेप की अनुमति केवल तभी मिलती है जब यह किसी व्यक्ति को अधिक स्वतंत्रता और स्वतंत्रता प्राप्त करने में मदद करता है

व्यक्तियों को राज्य और सरकारी शक्ति का स्रोत बनाना

एक सीमित राजनीतिक दायित्व के सिद्धांत की वकालत करना

रविवार, 8 नवंबर 2020

French Secularism - फ्रांसीसी धर्मनिरपेक्षता


फ्रांस में नवीनतम संकट जो एक मध्य विद्यालय के इतिहास के शिक्षक की हत्या से निकला और फ्रांसीसी शहर नीस में हत्याओं ने एक बार फिर फ्रांस के धर्मनिरपेक्षता के अनूठे मॉडल को सुर्खियों में ला दिया।




फ्रांसीसी लॉसिटे या धर्मनिरपेक्षता को सामाजिक सामंजस्य की परियोजना और फ्रांसीसी नागरिकता के प्रमुख घटक के रूप में बेहतर समझा जाता है। यह चर्च और राज्य के औपचारिक अलगाव को शामिल नहीं करता है, बल्कि सार्वजनिक स्थान से धार्मिक मूल्यों को हटाने और स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के साथ उनके प्रतिस्थापन को भी शामिल करता है।


इसने फ्रांसीसी समाज में सामाजिक तनाव पैदा कर दिया है और देश को अपने आंतरिक मूल्यों को कम करने के लिए अपने उदार मूल्यों को फिर से व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया है। इस खोज में फ्रांस धर्मनिरपेक्षता के भारतीय मॉडल से प्रेरणा ले सकता है।


फ्रांसीसी धर्मनिरपेक्षता का विकास

1905 में फ्रांसीसी क्रांति के दौरान धर्मनिरपेक्षता का फ्रांसीसी मॉडल विकसित किया गया था, जब एक फ्रांसीसी कानून ने चर्च और राज्य को अलग कर दिया, इस प्रकार आधुनिक समय में फ्रांसीसी धर्मनिरपेक्षता (laïcité) की शुरुआत को चिह्नित किया।

Lacité ”का मतलब फ्रांसीसी शब्द लॉरी-नॉन-पादरियों या लोगों के लिए है।

शनिवार, 22 अगस्त 2020

CITES (The Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora )

What is CITES and why it is important

 वन्य जीवों और वनस्पतियों (CITES) की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसके लिए राज्य और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण संगठन स्वैच्छिक रूप से पालन करते हैं।

1963 में इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के सदस्यों की एक बैठक में अपनाए गए एक प्रस्ताव के परिणामस्वरूप CITES का मसौदा तैयार किया गया था।

IUCN एक सदस्यता संघ है जो विशिष्ट रूप से सरकार और नागरिक समाज दोनों संगठनों से बना है।

यह सार्वजनिक, निजी और गैर-सरकारी संगठनों को ज्ञान और उपकरण प्रदान करता है जो मानव प्रगति, आर्थिक विकास और प्रकृति संरक्षण को एक साथ करने में सक्षम बनाते हैं।

जुलाई 1975 में सीआईटीईएस लागू हुआ। वर्तमान में 183 पार्टियां हैं (देशों या क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण संगठन शामिल हैं)।

उद्देश्य:

 सुनिश्चित करें कि जंगली जानवरों और पौधों के नमूनों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उनके अस्तित्व को खतरा नहीं है।

CITES सचिवालय UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) द्वारा प्रशासित है और जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

रविवार, 31 मई 2020

LIST OF FOREIGN TRAVELLERS WHO CAME IN INDIA IN HINDI





मैगस्थनीज







मौर्यकालीन इतिहास (Mauryan History) जानने का सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत मैगस्थनीज (Megasthenes) द्वारा लिखी गई पुस्तक इंडिका है. मैगस्थनीज यूनानी था, जिसे यूनानी शासक सेल्यूकस ने अपना दूत बनाकर चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था. वह 302 ई.पू. से 298 ई.पू. तक मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र में रहा. दुर्भाग्यवश उसका मूल ग्रन्थ नष्ट हो गया है, किन्तु बाद के यूनानी यात्रियों – स्ट्रेबो, प्लिनी, एरियन आदि के द्वारा दिए गए उद्धरणों से मैगस्थनीज के विवरण के सम्बन्ध में जानकारी मिलती है. शानबैक ने उसके द्वारा दिए गए विवरण का संग्रह कर अंग्रेजी अनुवाद किया है.

डायमेकस


इसे सीरिया के शासक एंटिओकस प्रथम (Antiochus I) के द्वारा बिंदुसार के दरबार में दूत बनाकर भेजा गया था. स्ट्रेबो के लेखों में हमें डायमेकस के द्वारा दिए गए विवरण प्राप्त होते हैं. उसके विवरण के अनुसार बिंदुसार ने सीरियन नरेश से अंजीर, मीठी शराब और यूनानी दार्शनिक मौर्य दरबार में भेजने को कहा था. सीरियन नरेश ने मीठी शराब और अंजीर तो भेज दी, पर यूनानी दार्शनिक भेजने में असमर्थता व्यक्त की. 

शनिवार, 30 मई 2020

जल संधि INDUS RIVER TREATY



क्या है यह सिन्धु जल संधि 


१. यह संधि भारत और पाकिस्तान के मध्य 1960 ई. में की गयी थी. भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु और पाकिस्तान के जनरल अयूब खान के बीच सिन्धु नदी के जल को लेकर यह समझौता हुआ था.

२. इस संधि के तहत सिन्धु नदी की सहायक नदियों को दो भागों में बाँट दिया गया – – – पूर्वी भाग और पश्चिमी भाग.

३. पूर्वी भाग में जो नदियाँ बहती हैं, वे हैं–> सतलज, रावी और व्यास. इन तीनों नदियों पर भारत का फुल कण्ट्रोल है.

४. पश्चिमी भाग में जो नदियाँ बहती हैं, वे हैं–> सिंध, चेनाब और झेलम. भारत सीमित रूप से इन नदियों के जल का प्रयोग कर सकता है.



५. इस संधि के अनुसार पश्चिमी भाग में बहने वाली नदियों का भारत केवल 20% भाग प्रयोग में ला सकता है. हालाँकि, भारत इनमें “रन ऑफ़ द रिवर प्रोजेक्ट” पर काम कर सकता है. रन ऑफ़ द रिवर प्रोजेक्ट का अर्थ हुआ—>वे पनबिजली उत्पादन संयंत्र जिनमें जल को जमा करने की आवश्यकता नहीं है.

६. यह 56 साल पुरानी संधि है. 

गुरुवार, 28 मई 2020

BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation)







BIMSTEC की स्थापना एवं स्वरूप

BIMSTEC का full form है – Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation.
यह एक क्षेत्रीय संगठन है जिसकी स्थापना Bangkok Declaration के अंतर्गत जून 6, 1997 में हुई थी.
इसका मुख्यालय बांग्लादेश की राजधानी ढाका में है.
वर्तमान में इसमें 7 देश हैं (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका) जिनमें 5 दक्षिणी-एशियाई देश हैं और 2 दक्षिण-पूर्व एशिया के देश (म्यांमार और थाईलैंड) हैं.
इस प्रकार के BIMSTEC के अन्दर दक्षिण ऐसा के सभी देश आ जाते हैं, सिवाय मालदीव, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के.

BIMSTEC के उद्देश्य

BIMSTEC का मुख्य उद्देश्य दक्षिण-एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (बंगाल की खाड़ी से संलग्न) के बीच तकनीकी और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है.
आज यह संगठन 15 प्रक्षेत्रों में सहयोग का काम कर रहा है, ये प्रक्षेत्र हैं –व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, मत्स्य पालन, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, आतंकवाद निरोध, पर्यावरण, संस्कृति, लोगों का लोगों से सम्पर्क, जलवायु परिवर्तन. 

राज्य के नीति-निर्देशक सिंद्धांत से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍य



राज्य के नीति-निर्देशक सिंद्धांत से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍य





राज्य के नीति निर्देशक सिंद्धांत का वर्णन संविधान के भाग-4 में (अनुच्छेद 36 से 51 तक) किया गया है. इसकी प्रेरणा आयरलैंड के संविधान से मिली है



1. राज्य के नीति निर्देशक सिंद्धांत का वर्णन संविधान के भाग-4 में (अनुच्छेद 36 से 51 तक) किया गया है. इसकी प्रेरणा आयरलैंड के संविधान से मिली है.

2. इसे न्यायलय द्वारा लागू नहीं किया जा सकता यानी इसे वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है.

राज्य नीति निर्देशक सिंद्धांत निम्न हैं:

अनुच्छेद 38 कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा, जिससे नागरिक को सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय मिलेगा.

अनुच्छेद 39 (क) सामान न्याय और नि:शुल्क विधिक सहायता, समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था इसी में है.

अनुच्छेद 39 (ख) सार्वजनिक धन का स्वामित्व तथा नियंत्रण इस प्रकार करना ताकि सार्वजनिक हित का सर्वोत्तम साधन हो सके.

अनुच्छेद 39 (ग) धन का समान वितरण.

अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों का संगठन.

अनुच्छेद 41 कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार.

अनुच्छेद 42 काम की न्याय-संगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध.

अनुच्छेद 43 कर्मकारों के लिए निर्वाचन मजदूरी एवं कुटीर उघोग को प्रोत्साहन.

अनुच्छेद 44 नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता.

अनुच्छेद 46 अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों की शिक्षा और अर्थ-संबंधी हितों की अभिवृद्धि.

अनुच्छेद 47 पोषाहार स्तर, जीवन स्तर को ऊंचा करने तथा लोक स्वाथ्य का सुधार करने का राज्य का कर्तव्य.

अनुच्छेद 48 कृषि एवं पशुपालन का संगठन

IMPORTANT ARTICLES Of Indian Constitutions


अनुच्छेद (Article) 1 – संघ का नाम औ राज्य क्षेत्र
अनुच्छेद (Article) 2 – नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
अनुच्छेद (Article) 3 – राज्य का निर्माण तथा सीमाओं या नामों मे परिवर्तन
अनुच्छेद (Article) 4 – पहली अनुसूचित व चौथी अनुसूची के संशोधन तथा दो और तीन के अधीन बनाई गई विधियां
अनुच्छेद (Article) 5 – संविधान के प्रारं पर नागरिकता
अनुच्छेद (Article) 6 – भारत आने वाले व्यक्तियों को नागरिकता
अनुच्छेद (Article) 7 – पाकिस्तान जाने वालों को नागरिकता
अनुच्छेद (Article) 8 – भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों का नागरिकता
अनुच्छेद (Article) 9 – विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर भारत का नागरिक ना होना
अनुच्छेद (Article) 10 – नागरिकता क अधिकारों का बना रहना
अनुच्छेद (Article) 11 – संसद द्वारा नागरिकता के लिए कानून का विनियमन
अनुच्छेद (Article) 12 – राज्य की परिभाषा
अनुच्छेद (Article) 13 – मूल अधिकारों को असंगत या अल्पीकरण करने वाली विधियां
अनुच्छेद (Article) 14 – विधि के समक्ष समानता
अनुच्छेद (Article) 15 – धर्म जाति लिंग पर भेद का प्रतिशेध
अनुच्छेद (Article) 16 – लोक नियोजन में अवसर की समानता
अनुच्छेद (Article) 17 – अस्पृश्यता का अंत
अनुच्छेद (Article) 18 – उपाधीयों का अंत
अनुच्छेद (Article) 19 – वाक् की स्वतंत्रता
अनुच्छेद (Article) 20 – अपराधों के दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण
अनुच्छेद (Article) 21 – प्राण और दैहिक स्वतंत्रता
अनुच्छेद (Article) 21 क – 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार 

Polity - अब तक पूछे गए प्रश्न





    उद्देशिका

    • 26 जनवरी 1950 को

    "संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य"

    • 42 amendment constitutional*****

             समाजवादी पंथनिरपेक्ष एवं अखंड- यह शब्द जोड़े गए

    • संविधान निर्माताओं का मत उद्देशिका में प्रतिबंधित होता है
    • Indian constitution का कौन सा भाग संविधान की आत्मा है उद्देशिका
    •  अंबेडकर के संदर्भ में -संवैधानिक उपचारों का अधिकार

     

     

    शासन प्रणाली

    राज्य के चार आवश्यक तत्व

    1. जनसंख्या
    2. भूभाग
    3.  सरकार
    4.  संप्रभुता (सबसे जरूरी)

     

    • गणतंत्र का मतलब

          भारत में वंशानुगत शासन नहीं है

     

    राष्ट्रीय प्रतीक

    • जन गण मन को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया= 24 जनवरी 1950
    • राष्ट्रीय चिन्ह= अशोक स्तंभ ( सारनाथ वाराणसी) को अपनाया= 26 जनवरी 1950
    • राष्ट्रीय ध्वज अपनाया 2 जुलाई 1947
    • राष्ट्रीय ध्वज में चक्र प्रतीक है न्याय का

     

    राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्र

    • आर्टिकल 2 =नए राज्यों का प्रवेश
    • आर्टिकल 3=नया राज्य को बनाने का अधिकार संसद द्वारा
    • संसद में साधारण बहुमत से बनाए जा सकते हैं
    • UT के लिए कितनी सीटें आरक्षित है= 20
    • भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ= 1956*****

     

    नागरिकता

    • नागरिकता को तय करने का अधिकार संसद को है
    • भारतीय मूल के व्यक्ति को भारत की नागरिकता मिलेगी भारत में 7 वर्ष बिताने पर

     

    मूल अधिकार

    • मूल अधिकार सिर्फ आपातकाल में निलंबित हो सकते हैं
    • मूल अधिकारों का जिक्र पहली बार नेहरू रिपोर्ट में हुआ
    • Article 17=अस्पृश्यता का उन्मूलन******
    • आर्टिकल 24=बच्चों के शोषण से संबंधित है******
    • प्रेस की स्वतंत्रता संबंधित है=article 19 (1)(a)*****

      वाक स्वतंत्रता के अंतर्गत

    • एकांत का अधिकार= article 19 (1) +आर्टिकल 21
    • संपत्ति का अधिकार कब खत्म हुआ=44th amendment 1978*********
    • Article 19=अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार (विदेशियों को प्राप्त नहीं है)
    • आर्टिकल 25 में प्रयुक्त हिंदू शब्द में किसे सम्मिलित नहीं किया गया है पारसी धर्म
    • व्यक्ति की स्वतंत्रता का महान रक्षक किसे कहा गया=बंदी प्रत्यक्षीकरण

     

    नीति निदेशक तत्व

    • आयरलैंड से लिए गए हैं और कल्याणकारी राज्य का समावेश करते हैं
    • यह न्यालय द्वारा बदले नहीं जा सकते हैं और वाद योग्य भी नहीं है
    • Article 39d=समान कार्य के लिए समान वेतन
    • आर्टिकल 51=भारत की विदेश नीति से संबंधित

     

    मूल कर्तव्य (भाग 4 )

    • कुल 11 है** और इन्हें सरदार स्वर्ण सिंह की सिफारिश से लाया गया
    • 42nd amendment द्वारा लाए गए***
    • वन्य प्राणियों के संरक्षण की भी बात करता है

     

    संविधान सभा एवं संविधान निर्माण की प्रक्रिया

    • भारतीयों की ओर से सर्वप्रथम संविधान सभा की मांग की गई 1934 स्वराज्य पार्टी रांची में
    • 1934 में ही संविधान सभा के गठन का विचार MN Roy ने दिया
    • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्तर पर पहली बार वर्ष 1935 में संविधान निर्माण के लिए आधिकारिक मांग की गई l
    • कैबिनेटकैबिनेट योजना के तहत 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया=प्रतिनिधि निर्वाचन के आधार पर**
    • एक निर्वाचित संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान निर्माण करने का प्रस्ताव दिया गया था=cripps mission 1942
    • संविधान सभा के सदस्यों को चुना गया=विभिन्न प्रांतों की विधानसभाओं के द्वारा*****
    • यह वयस्क मताधिकार पर आधारित थी और अप्रत्यक्ष निर्वाचन का परिणाम थी
    • पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 अस्थाई अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद सिन्हा*****
    • दूसरी बैठक 11 दिसंबर 1946 स्थाई अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद****
    • संविधान सभा के सम्मुख संविधान की प्रस्तावना का प्रस्ताव किसने रखा

    13 दिसंबर 1946 को एक उद्देश्य प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू**** ने पेश किया आगे चलकर यही प्रस्तावना का प्रारूप बना

    • भारतीय संविधान के निर्माण में संविधान सभा को 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन लगे इस दौरान 11 अधिवेशन हुए 11 वे अधिवेशन अंतिम दिन 26 नवंबर 1949 को हुआ और इसी दिन संविधान को अंगीकृत किया गया
    • 12 वां अधिवेशन 24 जनवरी 1950 को हुआ जिसमें भारत के संविधान पर हस्ताक्षर करना था
    • भारतीय संविधान के निर्माण के समय संवैधानिक सलाहकार कौन थे=बेनेगल नरसिंह राव BN Rao*****
    • संविधान सभा का पहला  प्रारूप किसने तैयार किया BN Rao
    • लाहौर अधिवेशन दिसंबर 1929 में पूर्ण स्वराज की घोषणा की गई थी और 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया था किंतु भारत 15 अगस्त कोई स्वतंत्र हो गया इसलिए 26 जनवरी की तिथि को अविस्मरणीय बनाने के लिए 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया
    • भारतीय  संविधान किसके द्वारा अधिनियमित किया गया या स्वीकृत किया गया= संविधान सभा****
    • तृतीय गोलमेज का परिणाम भारत सरकार अधिनियम 1935 था
    • संविधान  सभा कांग्रेस थी और कांग्रेस भारत था=granville Austin
    • संविधान  सभा मैं कुल कितनी महिला सदस्य थी= 15
    • प्रांतीय  संविधान समिति के अध्यक्ष सरदार पटेल
    • प्रारूप  समिति के अध्यक्ष. अंबेडकर*****
    • झंडा समिति के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद

     

    कंपनी के अंतर्गत पारित अधिनियम

    • 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट
    1. बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा
    2. कोलकाता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना का प्रावधान हुआ और इसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश था सर एलिजा इंपे
    • पिट्स इंडिया एक्ट 1784
    1. कंपनी के राजनीतिक और व्यापारिक कार्यों को अलग किया गया
    2. राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए बोर्ड ऑफ कंट्रोल का गठन किया गया
    • 1813 चार्टर अधिनियम

              इंग्लिश मिशनरियों को भारत में कार्य करने की अनुमति

    • भारत में संघीय न्यायालय की स्थापना 1937 को इंडिया एक्ट 1935 के अंतर्गत की गई***
    • 1919 मांटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार

    प्रांतों में द्वैध शासन 1919 के अधिनियम में किया गया(द्विसदनीय व्यवस्था)

    • चार्टर एक्ट 1813
    1. पहली बार संपूर्ण भारत के लिए पृथक विधान परिषद की स्थापना हुई आगे चलकर यह लघु संसद बनी
    2. पहली बार सिविल सेवा में भारतीयों को शामिल किया गया
    • Government of India act 1858

    ब्रिटिश क्राउन शासन अपने हाथ में ले लिया

    • Indian council  act 1909 मार्ले मिंटो सुधार
    1. जाति वर्ग धर्म के आधार पर पृथक निर्वाचन प्रणाली की व्यवस्था
    2. लॉर्ड मिंटो को सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक कहा जाता है

     

    • 1935 के अधिनियम
    1. प्रांतों का द्वैध शासन खत्म किया गया और केंद्र में द्वैध शासन लगाया गया
    2. केंद्र और राज्यों  के बीच की शक्तियों का विभाजन किस योजना के आधार पर था=India act 1935
    3. आरबीआई की स्थापना
    4. जवाहरलाल  नेहरू ने गुलामी का अधिकार पत्र कहा
    5. लखनऊ अधिवेशन 1936 में इसे अस्वीकार कर दिया गया (अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू)
    6. इसमें अवशेष शक्तियां गवर्नर जनरल को दी गई**
    7. बर्मा भारत से अलग हुआ 1937 में

     

     

     

     

     

     


Banks Board Bureau: Composition & Functions

Banks Board Bureau: Composition & Functions

Introduction

Banks Board Bureau is the first ingenuity towards a holding company structure for public sector banks (PSBs). BBB is an autonomous body of Union Government of India tasked to improve the governance of Public Sector Banks, recommend selection of chiefs of government-owned banks and financial institutions and to help banks in developing strategies and capital raising plans.



It is situated at RBI’s Central Office in Mumbai. The chairman of Bank Board Bureau is Mr. Vinod Rai. He was the 11th Comptroller and Auditor General of India and is known for Audits on 2G spectrum allocation, Coal allocation.
The bureau was announced as part of the seven-point Indradhanush plan to revamp public sector banks.

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Composition


  • BBB have three ex-officio members (government) and three expert members, two of which are from the private sector, in addition to Chairman. 
  • The tenure of Rai and other members of the board are of two years. It is interesting to note that all the Members and Chairman are part time. 
  • BBB is not funded from the Consolidated Fund of India.
  • This step of forming BBB is seen as an interim step towards establishing a holding and investment Company for Banks, an idea first mooted at the maiden banking conclave Gyan Sangam.

Functions undertaken by BBB


  • The Bureau will recommend for selection of heads - Public Sector Banks and Financial Institutions and help Banks in developing strategies and capital raising plans.
  • The Bureau helps Banks in developing strategies and capital raising plans through innovative financial methods and instruments.
  • BBB also advises banks on strategies for consolidation among them including mergers and acquisitions.
  • It also infuses efficiency and transparency in the Banking sector.
  • Once it develops credibility, it can start viewing into the strategies of various banks and can give guidance to banks if they require. BBB will also be a link between the government and banks, and will work together with banks in developing strategies for them. Through this government is trying to professionalise the management of public sector banks.